रमज़ान 2026 कब से शुरू होगा: रमज़ान आने वाला है – बरकतों, रहमतों और मग़फ़िरत का महीना

रमज़ान 2026 आने वाला है – रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का मुबारक महीना

Ramadan 2026 date in India with crescent moon and mosque illustration



रमज़ान आने वाला है, और यह ख़बर हर मुसलमान के दिल को ख़ुशी, सुकून और उम्मीद से भर देती है। इस साल रमज़ान 18 फ़रवरी 2026 (Wednesday) से शुरू होने की संभावना है, जिस दिन चाँद नज़र आने पर रोज़े की शुरुआत होगी।
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👉 रमज़ान 2026 कब से शुरू होगा

यह वही मुबारक महीना है जिसमें अल्लाह तआला अपनी रहमतों के दरवाज़े खोल देता है, गुनाहों को माफ़ करता है और अपने बंदों को अपने करीब कर लेता है। रमज़ान सिर्फ़ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि यह एक रूहानी सफ़र है जो इंसान की ज़िंदगी को अंदर से बदल देता है।
जैसे-जैसे रमज़ान क़रीब आता है, मस्जिदों की रौनक़ बढ़ने लगती है, दिल इबादत की तरफ़ झुकने लगता है और हर मोमिन अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने का इरादा करता है। यह महीना तौबा, सब्र, शुक्र और नेकियों का पैग़ाम लेकर आता है।


रमज़ान क्या है? – एक मुकम्मल रूहानी महीना

रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने बहुत ही मुक़द्दस बनाया है। इसी मुबारक महीने में क़ुरआन-ए-पाक नाज़िल हुआ, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत और रहनुमाई है।

अल्लाह तआला फ़रमाता है:

“रमज़ान का महीना वह है जिसमें क़ुरआन नाज़िल किया गया, जो लोगों के लिए हिदायत है।”
(सूरह अल-बक़रा: 185)

इस महीने में मुसलमानों पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए, ताकि इंसान तक़वा हासिल करे और अपने नफ़्स पर क़ाबू पा सके।

रोज़े का मक़सद – सिर्फ़ भूख और प्यास नहीं


बहुत से लोग यह समझते हैं कि रोज़ा सिर्फ़ भूखा और प्यासा रहने का नाम है, जबकि हक़ीक़त यह है कि रोज़ा नफ़्स की तरबियत है। रोज़े का असली मक़सद है:
  • गुनाहों से बचना
  • झूठ, ग़ीबत और बुराई छोड़ना
  • गरीबों और भूखों का दर्द महसूस करना
  • अल्लाह से अपना रिश्ता मज़बूत करना

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया:

“जो शख़्स रोज़े की हालत में भी झूठ और बुराई नहीं छोड़ता, अल्लाह को उसके भूखे रहने की कोई ज़रूरत नहीं।”
इसीलिए रमज़ान में ज़ुबान, आँख, कान और दिल – सबका रोज़ा होता है।


रमज़ान की फ़ज़ीलत और बरकतें


रमज़ान के महीने की फ़ज़ीलत बयान से बाहर है। इस महीने में:

  • जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं
  • जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं
  • शैतानों को क़ैद कर दिया जाता है
  • नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है

एक छोटी सी नेकी का सवाब भी सत्तर गुना तक बढ़ जाता है। यह महीना अल्लाह की क़ुर्बत हासिल करने का सबसे बेहतरीन मौका है।

शब-ए-क़द्र – हज़ार महीनों से बेहतर रात

रमज़ान में एक रात आती है जो हज़ार महीनों से बेहतर होती है, जिसे शब-ए-क़द्र कहा जाता है। इस रात की इबादत पूरी ज़िंदगी की इबादत से बढ़कर होती है।

इस मुबारक रात में हमें चाहिए:

  • दिल से दुआ करें
  • क़ुरआन की तिलावत करें
  • अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें

अक्सर शब-ए-क़द्र रमज़ान के आख़िरी अशरे में पाई जाती है।

👉 शब-ए-क़द्र की दुआ

👉 शब-ए-क़द्र कब होती है

रमज़ान की तैयारी कैसे करें?

दिल की तैयारी

सच्चे दिल से तौबा करें

दिल से हसद, नफ़रत और कीना निकाल दें

सबको माफ़ कर दें

 इबादत की तैयारी

नमाज़ की पाबंदी शुरू करें

रोज़ाना क़ुरआन पढ़ने की आदत डालें

ज़िक्र और दुरूद बढ़ाएँइबादत

ज़िंदगी की प्लानिंग

फ़िज़ूल कामों से दूरी बनाएँ

मोबाइल और सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करें

इबादत के लिए वक़्त तय करें


सेहरी और इफ़्तार – सिर्फ़ खाना नहीं, इबादत है

सेहरी और इफ़्तार दोनों ही इबादत का हिस्सा हैं।
सेहरी करना सुन्नत है और इसमें बहुत बरकत होती है।
इफ़्तार जल्दी करना सुन्नत है और इफ़्तार से पहले की दुआ क़बूल होती है।
रोज़ेदार को इफ़्तार कराना बहुत बड़ा सवाब है, चाहे एक खजूर या पानी ही क्यों न हो।

रमज़ान और गरीबों का ख़याल

रमज़ान हमें सिखाता है कि हम सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जिएँ। इस मुबारक महीने में:

  • ज़कात और सदक़ा ज़्यादा से ज़्यादा दें
  • गरीबों, यतीमों और मिस्कीनों की मदद करें
  • भूखे को खाना खिलाएँ

यही असली रमज़ान की रूह है।

रमज़ान और परिवार – घर को इबादतगाह बनाएँ


रमज़ान परिवार के साथ जुड़ने का बेहतरीन मौका है।
परिवार के साथ नमाज़ अदा करना, बच्चों को रोज़े और दुआ की आदत डालना और घर में क़ुरआन की तिलावत का माहौल बनाना — इन सब से घर में रहमत और सुकून आता है।


रमज़ान के बाद भी रमज़ान वाली ज़िंदगी


सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि हम रमज़ान की अच्छी आदतों को रमज़ान के बाद भी जारी रखें। अगर रमज़ान में हम नमाज़ी बन गए, झूठ छोड़ दिया और बुराई से दूर हो गए — तो यही असली फ़तह है।

आख़िरी पैग़ाम


रमज़ान 18 फ़रवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है, और यह महीना हर मुसलमान के लिए अल्लाह की तरफ़ से बड़ी रहमत, बरकत और माफ़ी लाता है। हर साल हर किसी को रमज़ान नसीब नहीं होता। इसलिए जब यह मुबारक महीना आए, तो इसे दिल से अपनाएँ, रूह से महसूस करें और अपनी ज़िंदगी बदलने का ज़रिया बनाएँ।
अल्लाह तआला हमें रमज़ान की क़द्र करने, रोज़े रखने, इबादत करने और अपनी रहमतों का हक़दार बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन।

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