Ashab e Kahf ka Waqia in Hindi । असहाब ए कहफ का वाकया।

अस्सलाम अलैकुम प्यारे दोस्तों, असहाब ए कहफ कौन थे, कितने थे, गार में क्यों छुपे थे, उनके साथ कौन सा जानवर था, उनको अल्लाह ताला ने कितना अरसा सुलाएं रखा? ये पूरा वाकया अल्लाह तआला ने कुरआन ए पाक में बयान फरमाया है और इस हवाले से मुकम्मल सूरत कुराने पाक में नाजिल फ़रमाई है। इस सूरत का नाम सूरह कहफ इसी गार के निसबत से है, जिसमें यह असहाब छुपे थे और अल्लाह ने उनको इसी गार में सुलाएं रखा। आज के इस आर्टिकल में आपको असहाब ए कहफ का मुकम्मल वाक्या बताएंगे। आर्टिकल दिलचस्प होने के साथ ईमान अफ़रोज़ भी है। लिहाजा इस आर्टिकल को पुरा आखिर तक जरूर पढ़ें।

Ashab e Kahf ka Waqia in Hindi । असहाब ए कहफ का वाकया।

दोस्तों हाफिज इब्ने जरीर तिब्री रहमतुल्लाह अलैह ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजिअल्लाहू तआला अनहू से सूरह कहफ का शान ए नजूल यू नकल किया है। के मक्का मुकर्रमा के कुछ सरदारों ने दो आदमी मदीना मुनव्वरा के यहूदी उलमा के पास ये मालूम करने के लिए भेजे के तौरात और अंजिल के ये उलमा आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के दावा ए नबुवत के बारे में क्या कहते हैं? यहूदी उलमा ने उनसे कहा कि आप हज़रत मोहम्मद ए मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से तीन सवालात कीजिये। अगर उनका सही जवाब दे दे तो समझ लेना चाहिए कि वो वाकई वो अल्लाह तआला के नबी है और अगर वो सही जवाब ना दे सके तो इसका मतलब यह होगा कि उनका नबुवत का दावा सही नहीं है।

1- पहला सवाल ये था कि उन नौजवानों का वो अजीब वाकया बयान करे जो किसी जमाने में शिर्क से बचने के लिए अपने शहर से निकलकर किसी गार में छुप गए थे।
2- दूसरे इस शख्स का हाल बताएं जिसने मुशरिक से मगरिब तक पूरी दुनिया का सफर किया था,
3- तीसरा उनसे पूछें के रूह की हकीकत क्या है?

चुनांचे ये दोनों शख्स मक्का मुकर्रमा वापिस आये और अपनी बिरादरी के लोगों को साथ लेकर उन्होंने। आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से ये तीन सवाल पूछे। पहले दो सवालात के जवाब में ये सूरत यानी सुरह कहफ नाजिल हुई। इसमें गार में छुपने वाले नौजवानों का वाकया तफ्सील से बयान फरमाया गया है। उन्हीं को असहाब ए कहफ कहा जाता है।

प्यारे दोस्तों याद रहे के कहफ अरबी में गार को कहते हैं। असहाब ए कहफ के मायने हुआ गार वाले। और इसी गार के नाम पर सूरत को सुरह कहफ कहा जाता है।

दूसरे सवाल के जवाब में सूरत के आखिर में जुलकरनैन का वाक्य बयान फरमाया गया है, जिन्होंने मुशरिक से मगरिब तक का सफर किया था। इसके अलावा ऐसी सूरत में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का वो वाकया भी बयान फ़रमाया गया है। जिसमें वो हज़रत खिजर अलैहिस्सलाम के पास तशरीफ ले गए थे। और कुछ अरशा उनकी माअयत में सफर किया था।

ये तीन वाक्यात इस सूरत का मरकज़ी मौजू है इस सूरत की तफसीर में ये वाक़्यात भी आगे चलकर बयान होंगे, लेकिन पहले आपको असहाब ए कहफ का मुकम्मल वाकया सुनाते हैं।

Ashab e Kahf ka Waqia in Hindi । असहाब ए कहफ का वाकया।

प्यारे दोस्तों, रिवायत में आता है के हज़रत ईशा अलैहिस्सलाम के आसमान पर उठा लिए जाने के बाद ईसाइयों का हाल बेहद खराब और निहायत बद्तर हो गया, लोग बूतपरस्ती करने लगे और दूसरों को भी बुतपरस्ती पर मजबूर करने लगे। खशूशं उनका एक बादशाह था जिसका नाम दकियानूस था वो तो इस कदर ज़ालिम था कि जो शख्स बुतपरस्ती से इनकार करता था ये उसको कत्ल कर डालता था। असहाब ए कहफ शहर अफसोस के सूरफा थे जो बादशाह के मुअजज दरबारी भी थे, मगर ये लोग साहिब ए इमान और बुतपरस्ती से इंतहाई बेज़ार थे । दकियानूस के जुल्म जबर से परेशान होकर ये लोग अपना ईमान बचाने के लिए उसके दरबार से भाग निकले और करीब के एक पहाड़ में एक गार के अंदर पनाह लिए और सो गए । दकियानूस ने जब उन लोगों को तलाश कराया और उसको मालूम हुआ कि ये लोग गार के अंदर है तो वो बेहद नाराज हुआ । और गुस्से में आकर ये हुक्म दे दिया की गार को एक मजबूत दीवार उठाकर बंद कर दिया जाए ताकि ये लोग उसी में रहकर मर जाए और वही गार उन लोगों की कब्र बन जाए।
लेकिन दोस्तों रिवायत बताती हैं कि दकियानूस ने जिस शख्स के सुपूर्द ये काम दिया था वो बहुत ही नेक दिल और साहीब ए इमान आदमी था। उसने असहाब ए कहफ के नाम उनकी तादाद और उनका पूरा वाकया एक तख्ती पर कुंदा करके तांबे के संदूक के अंदर रखकर दीवार की बुनियाद में रख दिया । और इस तरह की एक तख्ती शाही खजाने में भी महफूज करा दी। कुछ दिनों के बाद दकियानूस बादशाह मर गया और सल्तनतें बदलती रही यहा तक की एक नेक दिल और इंसाफ परवर बादशाह जिसका नाम वैदरूश था। तख्त नशी हुआ । जिसने 68 साल तक बहुत शान वो शौकत के साथ हुकुमत की, उसके दौर में मज़हबी फिरका बंदी शुरू हो गई और बाज लोग मरने के बाद उठने और कयामत का इनकार करने लगे।
कौम का यह हाल देखकर बादशाह रंजो गम में डूब गया और वो तन्हाई में एक मकान के अंदर बंद होकर खुदावंद कुद्दुश के दरबार में निहायत बेकरारी के साथ गिरी व जारी करके दुआंए मांगने लगा कि या अल्लाह अज़्वजल कोई ऐसी निशानी ज़ाहिर फरमा दें ताकि लोगों को मरने के बाद जिंदा होकर उठने और कयामत का यकीन हो जाए। बादशाह की ये दुआ कबूल हो गई और अचानक बकरियों के एक चरवाहे ने अपनी बकरियों को ठहराने के लिए उसी गार को मुंतखिब किया और दीवार को गिरा दिया।

दीवार गिरते ही लोगों पर ऐसी हैबत वो दहशत सवार हो गई की दीवार गिराने वाले कांपते हुए वहाँ से भाग गए और असहाब ए कहफ अल्लाह के हुक्म से अपनी नींद से बेदार होकर उठ बैठे और एक दूसरे से सलामों कलाम में मशगूल हो गए और नमाज़ भी अदा कर ली। जब उन लोगों को भूख लगी तो उन लोगों ने अपने एक साथी यमलीखा से कहा कि तुम बाजार जाकर कुछ खाना लाओ और निहायत खामोशी से ये भी मालूम करो के दकियानूस हम लोगों के बारे में क्या इरादा रखता है। यमलीखा गार से निकलकर बाजार गए और यह देखकर हैरान रह गए कि शहर में हर तरफ दिन ए ईशवी का चर्चा है और लोग ऐलानिया हजरत ईशा अलैहिस्सलाम का कलमा पढ़ रहे हैं।
यमलीखा ये मंजर देखकर हैरतजदा हो गये। के इलाही ये माजरा क्या है? इस शहर में तो इमान का नाम लेना भी जुर्म था आज ये इंकलाब कहां से और क्यों कर आ गया? फिर ये एक नानबाई की दुकान पर खाना लेने गए और दकियानूसी जमाने का रुपया दुकानदार को दिया, जिसका चलन बंद हो चुका था बल्कि कोई इस सिक्के का देखने वाला भी बाकी नहीं रह गया था। दुकानदार को सुबहा हुआ कि शायद उस शख्स को कोई पुराना खजाना मिल गया है। चुनांचे से दुकानदार ने उनको हुक्काम के सुपुर्द कर दिया और हुक्काम ने उनसे खजाने के बारे में पूछताछ शुरू कर दी और कहा की बताओ खजाना कहा है? यमलीखा ने कहा कि कोई खजाना नहीं है, ये हमारा ही रुपया हैं। हुक्काम ने कहा कि हम किस तरह मान लें कि रुपया तुम्हारा है? ये सिक्का 300 वर्ष पुराना है और वर्षों गुजर गए कि सिक्के का चलन बंद हो गया और तुम अभी जवान हों। लेहाजा साफ साफ बताओ के मसला हल हो जाए। यह सुनकर यमलीखा ने कहा कि तुमलोग ये बताओ के दकियानूस बादशाह का क्या हाल है? हुक्काम ने कहा कि आज रूऐ जमीन पर उस नाम का कोई बादशाह नहीं है। हां सैकड़ों बरस गुजरे इस नाम का एक बेईमान बादशाह गुजरा है, जो बुतपरस्त था। यमलीखा ने कहा कि अभी कल ही तो हम लोग उसके खौफ से अपने ईमान और जान को बचा कर भागे है। मेरे साथी करीब के एक गार में मौजूद है, तुम लोग मेरे साथ चलो, मैं तुम लोगों को उन से मिला दू । चुनांचे हुक्काम और उमा ए दीन ए शहर कसीर तादाद में उस गार के पास पहुंचे।
असहाब ए कहफ यमलीखा के इंतजार में थे। जब उनकी वापसी में देर हुई तो उन लोगों ने ख्याल कर लिया कि शायद यमलीखा गिरफ्तार हो गए और जब गार के मुँह पर बहुत से आदमियों का शोर गूंजा तो, उन लोगों ने सुना तो समझ बैठे की गालिबं दकियानूस की फौज हमारी गिरफ्तारी के लिए आ पहुंची है। तो ये लोग निहायत इखलास के साथ जिक्र ए इलाही और तौबा इस्तगफार में मशगूल हो गए। हुक्काम ने गार पर पहुँचकर ताबे का संदूक बरामद किया और उसके अंदर से तख्ती निकालकर पढ़ा तो उस तख्ती पर असहाब ए कहफ का नाम लिखा था और ये भी तहरीर था की एक मोमिनों की जमात अपने दिन की हिफाजत के लिए दकियानूस बादशाह के खौफ से इस गार में छुपी हुई है। तो दकियानूस ने खबर पाकर एक दीवार से उन लोगों को गार में बंद कर दिया है। हम ये हाल इसलिए लिखते हैं कि जब कभी भी ये गार खुले तो लोग असहाब ए कहफ के हाल पर मुत्ले हो जाए। हुक्काम तख्ती की इबारत पढ़कर हैरान रह गए और उन लोगों ने अपने बादशाह बैदरूश को इस वाक्ये की इत्तेला दी। फौरन ही बैदरूश बादशाह अपने साथियों और शहर के लोगों को साथ लेकर गार के पास पहुंचा तो असहाब ए कहफ ने गार से निकलकर बादशाह से मोनिका किया और अपनी सारी बातें ब्यान की ।
बैदरूश बादशाह सजदे में गिरकर खुदावंद कुद्दुश का शुक्र अदा करने लगा कि मेरी दुआ कबूल हो गयी और अल्लाह तआला ने ऐसी निशानी ज़ाहिर कर दी जिससे मौत के बाद जिंदा होकर उठने का हर शख्स को यकीन हो जाए ।

रिवायात में आता है कि असहाब ए कहफ बादशाह को दुआएं देने लगे के अल्लाह तेरी बादशाही की हिफाजत फरमाएं। अब हम तुम्हें अल्लाह के सुपूर्द करते है। फिर असहाब ए कहफ ने अस्सलाम अलैकुम कहा और गार के अंदर चले गए और सो गए और उसी हालत में अल्लाह तआला ने उन लोगों को वफात दे दी।
बादशाह बैदरूश ने साल की लकड़ी का संदूक बनवाकर असहाब ए कहफ के मुक़द्दस लाशों को उस में रखवाया। और अल्लाह तआला ने असहाब ए कहफ का ऐसा रूप लोगों के दिलों में पैदा कर दिया। के किसी की यह मजाल नहीं कि गार के मुँह तक जा सके। इस तरह असहाब ए कहफ के लाशों की हिफाजत का अल्लाह तआला ने सामान कर दिया। फिर बैदरूश बादशाह ने गार के मुँह पर एक मस्जिद बनवा दी और सालाना 1 दिन मुकर्रर कर दिया। कि तमाम शहर वाले उस दिन ईद की तरह जियारत के लिए आया करें।

याद रहे कि ये वाकया तफशीर उल खाजीन के जिल्द नंबर तीन से आप की खिदमत में पेश किया गया है।

प्यारे दोस्तों आपने असहाब ए कहफ का ये अजीब और दिलचस्प वाकया पढ़ा । जहाँ तक बात है असहाब ए कहफ की तादाद की तो रिवायत में आता है की तादाद में लोगों इख्तेलाफ हैं।
कुरान ए मजीद में अल्लाह तआला फरमाते हैं: आप सल्लल्लाहू अलैहि फरमा दीजिए - मेरा रब उनकी गिनती खुब जानता है उन्हें नहीं जानते मगर थोड़े।
रिवायात में आता है के अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजिअल्लाहू तआला अनहूमा ने फरमाया कि मैं उन्हीं कम लोगों में से हू जो असहाब ए कहफ की तादाद को जानते है। फिर आपने फरमाया की असहाब ए कहफ की तादाद (7) सात है और आठवां उनका कुत्ता है।
रही बात असहाब ए कहफ की नामों की तो याद रहे कि उनके नामों में भी बहुत इख्तेलाफ है।

असहाब ए कहफ़ की तादाद कितनी है और उनके नाम क्या हैं?

ये सात हज़रात थे उनके नाम नीचे लिखे है
  1. मक्सलमीना
  2. यमलीखा
  3. मरतुनुस
  4. बेनूनूस
  5. सारेनूनूस
  6. जुनवानुस
  7. कश्फीत तनूनूस ( ख़ज़ाईनुल इरफ़ान)
हाशिया जलालैन सफा नंबर 243 पर उनके नाम इस तरह हैं :
  1. यमलीखा
  2. मकसलमीना
  3. मश्लीना
  4. मरनुष
  5. वबरनूश
  6. शादनुष
  7. कफतीशी तुलूस
एक दुसरी रिवायत में है उनकी तादात नौ है और नाम यूं हैं :
  1. फहशलमीन
  2. तमलीख
  3. मरतुनस
  4. कश्तूनस
  5. बेरूनस
  6. दलीमूस
  7. बतूनस
  8. काबूस
  9. मिक्सलमीन

Conclusion:

असहाब ए कहफ अल्लाह तबारक व तआला की निशानीयो में से एक निशानी है। लिहाजा हमें आखिरत पर ईमान रखना चाहिए। अल्लाह तबारक व तआला ने हमें पैदा किया, हम मरेंगे और फिर अल्लाह तबारक व तआला हमें कयामत के दीन फिर से उठाएंगे। ये था असहाब ए कहफ का पुरा वाक़या। अल्लाह तबारक व तआला हम सब को दीन के रास्ते पर चलने कि तौफीक अता फरमाए। अमीन।

FAQ:

Q- असहाब ए कहफ़ किस नबी की शरीयत परअमल पैरा थे ?
A- ये लोग हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की शरीयत पर अमल पैरा थे बाज़ कहते है की यहूद की किताब में असहाब ए कहफ़ का ज़िक़्र मौजूद है और यहूद की किताब नस्रानीयत से पहले की है बस मालूम हुआ की आप लोग हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम से पहले के है।

Q- असहाब ए कहफ़ जिस बादशाह के ज़ुल्म व जबर से तंग आकर गार में जा छिपे थे उसका नाम किया था ?
A- उसका नाम दकियानूस था।

Q- असहाब ए कहफ के कुत्ते का नाम क्या है ?
A- उस का नाम कतमीर है शोएब जबाई कहते है की उस का नाम हमरान है

Q- असहाब ए कहफ़ कितने दिनों तक सोते रहे ?
A- शम्सी तारीख के एतिबार से ये लोग तीन सौ साल तक सोये और बाएतिबार क़मरी तीन सौ नौ साल।

Q- असहाब ए कहफ़ की बेदारी के वक़्त जो बादशाह हुक्मरा था उसका नाम क्या था?
A- उस बादशाह का नाम बेदरूस था बक़ौल दीगर उसका नाम तंद व सीस था।
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